नक्सलियों का आतंक देखना है, तो सड़क पर निकल जाइए. कहीं ट्रैफिक नहीं मिलेगी. दूर-दूर तक कोई वाहन नहीं दिखेगा. इक्के-दुक्के निजी वाहन पांच-दस किमी के बाद ही दिखेंगे. रविवार को झारखंड की सड़कों पर कुछ ऐसा ही नजारा था. नक्सलियों ने ऑपरेशन ग्रीन हंट के विरोध में चार राज्यों झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा में तीन दिनों के बंद का एलान किया है.
 
रांची : नक्सलियों के बंद के पहले दिन झारखंड की गतिविधियां पूरी तरह ठप रही. सड़कों पर दूर-दूर तक कोई वाहन नहीं दिखा. राज्य की मुख्य सड़कों सहित ग्रामीण इलाकों की सड़कों का भी यही हाल रहा. पांच हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन जहां-तहां खड़े रहे. ट्रकें लाइन होटलों के बाहर खड़े रहे.  ग्रामीण इलाकों में दुकानें नहीं खुली. लोगों ने घरों में रहना ही बेहतर समझा.      
 
सीसीएल, बीसीसीएल की खदानों में उत्पादन पर भी असर पड़ा. ढुलाई का काम पूरी तरह ठप रहा. हालांकि इस दौरान कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं घटी.एक अरब से अधिक का कारोबार ठपबंद का सबसे अधिक असर बाजार व उद्योग जगत पर पड़ा रहा है. व्यवसायियों व ट्रांसपोर्टरों का कारोबार ठप रहने से करोड़ों की क्षति हुई है. पहले दिन करीब 1.36 अरब का कारोबार ठप होने का अनुमान है. कोयला खदानों में काम नहीं होने व ढुलाई ठप रहने से करीब 10.50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित रहा. व्यावसायिक वाहनों के परिचालन ठप होने से ट्रांसपोर्ट उद्योग को तीन करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है. राजधानी समेत अन्य जिलों के बाजारों में करीब 51 करोड़ रुपये का कारोबार ठप रहा. सिर्फ रांची के व्यवसायियों का 25 करोड़ का कारोबार ठप रहा. लोहरदगा में हिंडाल्को का काम पूरी तरह प्रभावित रहा. कोल्हान क्षेत्र में लौह अयस्कों की ढुलाई प्रभावित होने से 45 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही जा रही है. |