| | गाय पाल कर बेटी को बनाया एयर होस्टेस | | | |
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| | औरंगाबाद  अमीरी की कब्र पर पनपी गरीबी बड़ी जहरीली होती है -कुछ ऐसा ही हुआ लालती देवी के साथ. एक वह समय था, जब लालती देवी के पति सुरेश चंद्र सिंह डालमियानगर में रोहतास उद्योग में अच्छे  पद पर कार्यरत थे. अच्छी कमाई थी. उद्योग बंद हो जाने के बाद वह बेसहारा हो गयी. घर-गृहस्थी चलाना आफत हो गया.हिम्मत नहीं हारी  लालती देवी बेरोजगार पति के साथ डालमियानगर से मोहनिया पहुंची. यहां एक परचून की दुकान खोली. लेकिन वह नहीं चल सकी. ओर्थक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती गयी. दुकान बंद हो चुकी थी. आगे कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था. उसने अपना कदम औरंगाबाद शहर की तरफ बढ़ाया. न्यू एरिया मुहल्ले में एक साधारण घर में रहने लगी. यहां आकर वह जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में लग गयी.बछिया खरीदी लालती देवी ने दिनेश मिश्रा से 40 रुपये में बछिया खरीदी. यह बछिया ‘लछमिनिया’ साबित हुई. पशुपालन विभाग के डीएचओ सेवानिवृत्त होनेवाले थे. वह अपनी गाय को गांव ले जाना नहीं चाहते थे. लालती ने उनकी गाय तीन हजार रुपये में खरीद ली. इधर, बछिया भी गाय बन गयी. अब दो गायों के दूध से इतनी आमदनी होने लगी कि जिंदगी की गाड़ी चल सके. दोनों बेटे और बेटी की पढ़ाई को सहारा मिल गया.बेटा-बेटी को पढ़ाया लालती देवी ने घर में सीमित खर्च कर अपने बेटों और बेटी को अच्छी शिक्षा दी. बेटी संगीता इतनी मेधावी निकली कि दिल्ली में हुए एयर होस्टेस के साक्षात्कार में उसने प्रथम स्थान हासिल किया. पढ़ाई समाप्त कर वह एयर होस्टेस बन गयी. उसकी मासिक तनख्वाह 40 हजार रुपये है. बेटे बृज कुमार का यूपी पुलिस में चयन हो गया. आज लालती देवी के पास गायों की संख्या बढ़  कर 10 तक पहुंच गयी है. दूध बेच कर उसने इसी शहर में जमीन खरीदी और एक छोटा-सा घर भी बनाया. सचमुच, जज्बा हो तो गम के बादल उड़ जाते हैं और फिर से बहार आ जाती है. |
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