शिकागो  नये अध्ययन से पता चला है कि बिना किसी नैतिक ज्ञान के महज परहेज और संयम के जरिये किशोरों को सेक्स जैसी गतिविधियों से दूर रखना संभव है. नये अध्ययन के जरिये उन्हें यह नैतिक शिक्षा नहीं दी जाती है कि उनकी उम्र में सेक्स ठीक नहीं है. सेक्स शादी के बाद की क्रिया है. बल्कि इस शिक्षा के जरिये उन्हें यह बताया जाता है कि उनकी उम्र में ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से क्या खतरे पैदा हो सकते हैं. यह अध्ययन 12 साल के किशोरों पर किया गया. जिसमें उन्हें चार विकल्पों में से एक विकल्प पर काम करने को कहा गया. किशोरों से कहा गया कि वे आठ घंटे के संयम और परहेज संबंधी क्लास जा सकते हैं या फिर सुरक्षित सेक्स संबंधी क्लास में वे शामिल हो सकते हैं. या वैसे क्या वो जा सकते हैं जिसमें दोनों चीजों के बारे में बताया जा रहा था. यहां तक कि सामान्य संबंधी व्यवहारों से संबंधित क्लास में भी किशोरों को जाने का विकल्प दिया गया. अब इनके नतीजों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया. दो साल बाद पता चला कि जिन छात्रों को उनकी उम्र में सेक्स करने से होनेवाले नतीजों के बारे में बताया गया वे दूसरे क्लास के किशोरों के मुकाबले सेक्स जैसी गतिविधियों में कम शामिल हुए. दरअसल अमेरिका में इस तरह के अध्ययन सरकार ने जब से पुरानी  सेक्स शिक्षा को नकार दिया गया है. तब से अमेरिका में इस तरह के अध्ययनों के नतीजें को गंभीरता से लिया जाने लगा है. सरकार का मकसद किशोरों में मां बनने की तीव्रता को रोकने का है. |