नयी दिल्ली : आतंरिक सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि उन्हें एक दूसरे के हाथ मजबूत करके ही सुलझाया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने यहां आतंरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आतंरिक सुरक्षा ऐसा क्षेत्र है जिस पर केंद्र तथा राज्यों को लगातार निगरानी और समन्वय बनाए रखने की जरूरत है. हमें देश में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मौजूदा प्रणालियों की नियमित रूप से मिलकर समीक्षा करनी चाहिए तथा खतरों का आकलन कर जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हम आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को सुलझाने में तभी सफ़ल हो सकते हैं जब हम एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहेंगे. डॉ सिंह ने राज्यों से पुलिसबलों के लिए ढांचागत सुविधाओं तथा प्रशिक्षण की खातिर बजट में अधिक आवंटन करने का आह्वान किया. उनका कहना था कि राज्यों के बजट में पुलिस के लिए किये जाने वाले आवंटन का 80 प्रतिशत वेतन, पेंशन तथा अन्य भत्तों में खर्च हो जाता है. प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से अपने राज्यों में त्वरित कार्रवाई दस्तों की गति तथा निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष हस्तक्षेप इकाइयां गठित करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि राज्य आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष कमांडो बल भी गठित करना चाहेंगे. उन्होंने राज्यों से अपनी गुप्तचर क्षमताएं बढ़ाने के लिए केंद्र द्वारा उनकी विशेष शाखाओं की मदद के लिए बनायी गयी योजना का पूरा फ़ायदा उठाने का अनुरोध किया. पुलिस में खाली पदों को भरने तथा प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान नहीं दिये जाने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गत सितंबर तक राज्यों तथा केंद्र शासित क्षेत्रों पुलिस बलों में करीब तीन लाख 94 हजार पद रिक्त थे. आंतरिक सुरक्षा की चिंताओं का उल्लेख करते हुए डॉ सिंह ने कहा कि देश में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के लिए सीमा पार से देश के खिलाफ़ विद्वेष रखने वाले गुट तथा तत्व काम कर रहे हैं. जम्मू-कश्मीर इन गुटों के कारनामों का दंश ङोल रहा है. पूवरेत्तर में विद्रोही गतिविधियां हैं तथा हिंसा की घटनाएं होती हैं. कई राज्य वामपंथी उग्रवाद से पीड़ित हैं जिसे वह पहले आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बता चुके हैं.