| | यूरोप के ऋण संकट से गिरे शेयर बाजार | | | |
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| |  मुंबई : यूरोप के यूनान, स्पेन और पुर्तगाल में ऋण संकट गहराने की आशंका से दुनिया भर के बाजारों के साथ- साथ भारतीय शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गयी. बीते सप्ताह के अंत में मुंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 442 अंक ढहते हुए 16 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे उतरकर गया. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 124 अंक लुढ़क गया. इस सप्ताह देश के दोनों शेयर बाजार छह दिन खुले. शनिवार को एक घंटे का विशेष सत्र बुलाया गया जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने बढ़त दर्ज की थी. महंगाई रोकने के लिए सरकार के कड़े उपाय और मंदी से उबरने के लिए दिए गए राहत पैकेज को आंशिक रूप से वापस लेने की आशंकाओं के बीच आलोच्य सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 442.31 अंक उतरते हुए 15915.65 अंक पर बंद हुआ. इससे पिछले सप्ताहांत में यह 16357.25 अंक पर बंद हुआ था. निफ्टी ने भी सेंसेक्स की राह पकड़ी और यह गिरावट में रहा. सप्ताह के अंत तक यह 124.80 घटते हुए 4757.25 अंक पर बंद हुआ. इससे पिछले सप्ताहांत में यह 4882.80 अंक पर रहा था. बीते सप्ताह के दौरान यूनान, स्पेन और पुर्तगाल में ॅण संकट गहराने की आशंका छायी रही. इससे जहां डॉलर सात माह की ऊंचाई पर पहुंच गया वहीं से भारतीय शेयर बाजारों में से विदेशी पूंजी की निकासी की आशंका बन गयी. इससे बीएसइ में सप्ताह के आखिरी दो दिनों में जमकर बिकवाली हुयी. हालांकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इन देशों को वित्तीय मदद करने का आश्वासन दिया है जबकि ब्रिटेन ने इसे चिंताजनक स्थिति बताया है. निवेशकों का मानना है कि यूरोपीय संघ के अन्य देशों में यूनान जैसा ॅण संकट आ सकता है. उनका कहना है कि यह केवल यूनान नहीें है बल्कि स्पेन और पुर्तगाल भी है.यूरोपीय संघ में आर्थिक एवं मौद्रिक मामलों के आयुक्त जेकलिन अल्मुनिया ने कहा कि यूनान जैसी समस्याओं का सामना कुछ अन्य देश भी कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार में सुधार होने की संभावना क्षीण है. यूरोप,अमेरिका और देश में हो रहे घटनाक्रम शेयर बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह को प्रभावित करेंगे. अमेरिका में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया है जबकि यूरोप के निवेशक अपने अपने देश की समस्याओं से निपटने को प्रमुखता देंगे. इधर देश में बजट के दौरान कड़े मौद्रिक उपाय किए जाने की संभावना है.  |
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