रांची : प्रभात खबर को एक मां का दर्द भरा पत्र मिला. इसमें उसके बीमार बेटे की पीड़ा का जिक्र है. लिखा है, कैसे कम आय के बावजूद उसने अपने बेटे को हेपेटाइटिस का टीका लगवाया. इसके बाद भी उसके जिगर के टुकड़े को हेपेटाइटिस हुआ. फिर क्या था. पूरा परिवार तबाह हो गया. प्रभात खबर ने इस पत्र के बाद पड़ताल की, कैसे टीकाकरण के बाद भी सब कुछ बेअसर रहा. टीकाकरण के विभिन्न पहलुओं को जानने की कोशिश की. ओखर चूक कहां हुई.बच्चों की बेहतर चिकित्सा सुविधा के नाम पर अभिभावक बटुआ नहीं देखते. अपनी हैसियत से सब कुछ करते हैं. गरीब से गरीब अभिभावक बच्चे को जन्म से लेकर 10 वर्ष की उम्र तक विभिन्न बीमारियों से बचाने के हर उपाय करते हैं. पर, टीकाकरण के नाम पर नन्हे बच्चों के साथ खिलवाड़ भी हो रहा है. डॉक्टर जन्म से 10 वर्ष के अंतराल पर समय-समय पर हेपेटाइटिस-ए, बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, हिब, हिब-बुसटर, टायफाइड के टीके लगाने की सलाह देते हैं. मां-बाप इसके लिए डॉक्टरों के पास जाते हैं. उनसे सलाह लेते हैं. पर, इसके बाद भी चूक होती है. टीके बेअसर हो जाते हैं. और बीमारियां हावी.रख-रखाव का तरीका अलगटीके के रख-रखाव का तरीका एकदम अलग है. इनके उत्पादन से लेकर अस्पतालों, क्िलनिक और दवा दुकानों में रखने के  अलग मापदंड हैं.  रख-रखाव तय मापदंडों के अनुसार नहीं हुआ, तो फिर बेअसर. पोलियो, चेचक या फिर हेपेटाइटिस. केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें इनके उन्मूलन के नाम पर करोड़ों खर्च कर रही हैं. लेकिन इन्हें पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका. सरकार से लेकर वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इन टीकों के रख-रखाव के लिए विशेष एहतियात बरतने का निर्देश दिया है. पर, सभी तरह के अस्पतालों में इसका खुला उल्लंघन होता है. कई जगहों पर कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं होती. कहीं है भी, तो कारगर नहीं.दो से आठ डिग्री सेल्सियस पर रखना हैटीकों को दो से आठ डिग्री सेल्सियस पर रखना है. 24 घंटे शीत भंडारण की व्यवस्था होनी चाहिए. इन्हें बाहर या कमरे में नहीं रखा जा सकता. शीत भंडारण के लिए लगाये गये उपकरण को हमेशा चालू रखना है. इसके लिए अबाध बिजली आपूर्ति होनी चाहिए. सरकार का निर्देश तो यहां तक है कि ऐसी दवाओं को एक से दूसरी जगह ले जाने में के लिए भी शीत उपकरण से यु ट्रांसपोर्ट सुविधाओं का इस्तेमाल करना होगा. अस्पतालों और दवा दुकानों में 24 घंटे शीत भंडारण के लिए पूरी बैक-अप व्यवस्था नहीं होती. ऐसे में इन टीकों का असर खत्म हो जाता है.पोलियो के टीके के लिए खास इंतजामपोलियो के टीके को (-) 20 डिग्री पर रखना है. ओरल पोलियो की खुराक पिलाने के लिए इसकी दवाओं को हमेशा डीप फ्रीजर में रखा जाना चाहिए. जहां का तापमान (-) 20 डिग्री हो. यह सावधानी नहीं बरती गयी, तो खुराक का कोई असर नहीं होता. |