रांची : शहर में पॉलिथीन के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के प्रति बच्चे जागरूक होने लगे हैं. घरों में इसका उपयोग उन्हें रास नहीं आ रहा. डीपीएस की छठी के छात्र उद्भव ने अपने चाचा को ऐसा करने से रोका. घर में पॉलिथीन में सामान लाते हुए अपने चाचा को साफ कहा,
 
अंकल, पॉलिथीन में सामान क्यों लाये.
 
स्कूल भी हो सकते हैं अभियान में साझीदार
 
प्रभात खबर के पॉलिथीन के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान में स्कूली बच्चे सामने आने लगे हैं. कई स्कूलों ने प्रभात खबर कार्यालय में इस दिशा में संपर्क किया. प्रभात खबर ऐसे सभी स्कूलों व बच्चों से अपील करता है कि वह इस दिशा में खुद आगे बढ़ें. अभियान का हिस्सा बनें. उनके प्रयासों को हम प्रोत्साहित करेंगे.
 
जन जागृति का बवंडर उठाना होगा
 
अर्जुन प्रसाद जालान
 
आ ज पूरे विश्व में पॉलिथीन रच बस गया है. जीवनयापन के हर क्षेत्र में इसका योगदान बढ़ गया है. इसे अब पूर्णत नकारा नहीं जा सकता. किंतु इसके उपयोग को बहुत कम किया जा सकता है. इससे विश्व पर्यावरण को बचाया जा सकता है.       
 
पॉलिथीन के उपभोग कम करने के लिए  विश्व भर में तथा हमारे देश में भी सामाजिक, व्यापारिक  संगठनों ने अपने स्तर पर बहुत से बहुमूल्य योगदान दिया है. केवल सरकारी कानून या सरकारी दंड के जरिये इसके उत्पादन एवं उपभोग को कम नहीं किया जा सकेगा. इसमें तो जन-जागृति का एक बवंडर उठने से ही इसके उपभोग पर काबू पाया जा सकता है. कुछ व्यापारिक  उपाय जो विश्व के विभिन्न देशों में,हमारे देश के  विभिन्न प्रदेशों में किये गये हैं.     
 
प्लास्टिक से संबंधित उत्पादनों का उत्पादन की सीमा कम से कम मात्रा पर तय कर देनी चाहिए. 
 
       पूर्व में घरेलू आवश्यक सामग्री लाने ले जाने के लिए कपड़ों, जूट के झोले, थैले उपयोग में लाये जाते थे. कागज के ठोंगे,बैग उपयोग में लाये जाते थे. उनके उपभोग को प्रोत्साहन देना, इसके लिए दुकानदारों द्वारा अपने ग्राहकों से घर से झोला लाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए. इसके प्रोत्साहन  के लिए झोला लानेवाले  ग्राहकों की खरीद पर प्रोत्साहन राशि छूट के तौर पर दी जानी चाहिए. इसके विपरीत जो ग्राहक घर से झोला लेकर न आये उनसे दिये जाने वाले पैकिंग सामग्री  की कीमत ली जानी चाहिए. ओर्थक लाभ के कारणों से व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है.     
 
कपड़ा दुकानदारों द्वारा प्लास्टिक के थैले ग्राहकों की सुविधा के अलावा विज्ञापनों के लिए भी प्रयोग में लाये जाते है. ऐसे दुकानदारों के संघों द्वारा प्लास्टिक के थैले पर विज्ञापन प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. जूट के झोले पर विज्ञापन कर उसके लिए प्रोत्साहन देना चाहिए. इसी प्रकार जैविक उत्पादनों कपड़े, जूट, कागज इत्यादि के लिए पैकिंग सामग्री के उपभोग करने वाले प्रतिष्ठानों में एक प्रतियोगिता भी करायी जानी चाहिए.        मैं अपील कराना चाहूंगा कि लोग छोटे-मोटे जरत नहीं हों वहां से प्लास्टिक का उपयोग  बंद कर इस अभियान की शुरुआत करें. पॉलिथीन के पर्यावरण पर पड़नेवाले दुष्परिणामों पर गोष्ठी, सभाएं  की आवश्यकता है. इसके लिए भी तैयार हैं.
 
(लेखक एफजेसीसीआइ, रांची के पूर्व अध्यक्ष हैं.) |