डॉ अजय कुमार
 
कैंसर रोग विशेषज्ञ, अपोलो
 
वर्ल्ड कैंसर डे आज
 
रांची : आज दिन है एक संकल्प लेने का. वर्ल्ड कैंसर डे के मौके पर तंबाकू से तौबा करने का. यह तंबाकू, गुटखा, पान-मसाला, बीड़ी-सिगरेट की ही देन है कि पुरुषों में 40 से 50 फ़ीसदी ओरल कैंसर होता है. पर, लोग अपनी आदतों में सुधार करके कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं. इसमें सबसे प्रमुख तंबाकू का सेवन त्यागना है. इस बार वर्ल्ड कैसंर डे का थीम प्रिवेंशन ऑफ़ कैंसर ही है. यानी पूरे वर्ष कैंसर से बचाव के उपायों पर ही चर्चा होगी.पुरुषों में सबसे ज्यादा ओरल कैंसरबिहार-झारखंड में हर साल कैंसर के करीब दो हजार नये रोगी भरती होते हैं. इनमें से 40-50 फ़ीसदी रोगियों को मुंह से संबंधित कैंसर होता है. दूसरे नंबर पर सर्वाइकल कैंसर है. यह महिलाओं में होनेवाला प्रमुख कैंसर है.गरीबी और कैंसरगरीबी और कैंसर का यूं तो सीधा रिश्ता नहीं, पर गरीबों की मौत कैंसर से ज्यादा होती है. इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण उचित समय में इलाज के लिए न आना है. ये लोग जागरूकता  या पैसों के अभाव में सही समय पर इलाज के लिए नहीं आ पाते हैं, जिस कारण स्थिति हाथ से निकल जाती है. कैंसर के इलाज में सबसे जरूरी यही है कि इलाज पहले स्टेज में ही शुरू हो जाये. 
 
जीने की इच्छाशक्ति के सामने कैंसर भी बौना
 
पत्थलगांव (छत्तीसगढ़) : जीने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी इंसान के सामने बौनी लगती है. यह कहना है एक कैंसर से पीड़ित 75 वर्षीया गीता देवी शर्मा  का. पिछले 20 वषाब से गले में कैंसर से पीड़ित गीता देवी ने कहा कि वह आज भी एक स्वस्थ  की तरह हैं. उन्हें सामान्य दवा भी असर करती है. उन्होंने कहा : यदि मन में जीने की इच्छा न हो, तो बेहद महंगी दवा भी बीमारी में कोई असर नहीं करती.दो दशक पहले भिलाई अस्पताल में उनका ऑपरेशन हुआ था. कैंसर बीमारी से ग्रसित आंत नली के तीन फीट हिस्से को काट कर चिकित्सकों ने अलग कर दिया था. ऑपरेशन के बाद उन्हें जिंदगी के शेष बचे दिनों को खुशी खुशी जीने की सलाह दी थी. इसी बात को जिंदगी का मूल मंत्र बना कर गीता देवी अपने जीवन के हर पड़ाव को आसानी से पार करती जा रही हैं. |