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पॉलिथीनमौत का थैला
2/1/2010 8:56:16 AM

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राची : पॉलिथीन. आधुनिक युग की सुविधाओं में सबसे महत्वपूर्ण.  हर हाथ में पॉलिथीन.नन्हें बच्चे, युवा, बूढ़े सभी की आवश्यकता में शामिल. यह मानव जीवन में जितनी सुविधाएं लेकर आया, भविष्य के लिए उतनी ही मुश्किलें पैदा कर दिया. इसका प्रयोग तो धड़ल्ले से बढ़ा. पर, नष्ट न होने की अपनी प्रवृत्ति से आम जीवन को छोटा करता चला गया. बड़े-बड़े मॉल, दुकान इसके पोषक हैं. सड़कों पर, नालों में, घर के आसपास, हर जगह ढेर लगे हैं.जीवन पर घातक असरपॉलिथीन मौत का सामान है. इसके लगातार प्रयोग से कैेंसर जैसी जानलेवा बीमारी आम बात है. अध्ययन बताता है कि इसका प्रतिदिन इस्तेमाल करनेवाले 80 फीसदी लोगों में कैेंसर के लक्षण पाये जाते हैं. गर्भवती महिलाओं के लिए भी घातक है. बांझपन, लकवा, खून व किडनी संबंधित रोगों को भी बढ़ावा देता है. सांस और त्वचा  संबंधी बीमारी हो  सकती है.शिशुओं के विकास में बाधक होता है. इसे जलाने से मनुष्य के नर्व सिस्टम पर भी असर करता है. इसमें प्रयोग होनेवाले बिस्फेनॉल रसायन शरीर में डायबिटीज व लीवर एंजाइम को असामान्य कर देता है. खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ा देता है.        खुले में पड़े पॉलिथीन बैग पशुओं के लिए भी घातक हैं. इससे प्रति वर्ष लाखों पशु-पक्षियों की मौत होती है. इसमें शामिल विषा रसायन पेड़-पौधों के लिए भी जहर हैं.  सड़ता नहीं. पूरी तरह जलता नहीं. इसे कीड़े भी नहीं खा सकते. जमीन के नीचे दबाने पर यह धरती को बंजर बना देता है. जलाने की कोशिश पर ओजोन परत को नुकसानपहुंचाता है.

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