मुंबई  :  हिंदी फ़िल्मों में देशभक्ति के गीतों का एक अलग मुकाम रहा है. आजादी से पहले इन गीतों ने देशवासियों को गुलामी की जंजीरों को तोड़ने और स्वतंत्रता के बाद देश को मजबूत करने, राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की भावना का संचार करने में अहम भूमिका निभायी है. देशभक्ति के गीत रचने में कवि प्रदीप सबसे आगे रहे. उन्होंने किस्मत (1943), पैगाम, जागृति (1954) आदि फ़िल्मों में एक से बढ़ कर एक देशभक्ति गीतों के साथ ही कई गैर फ़िल्मी देश भक्ति गीत भी लिखे, जो आज भी बेहद लोकप्रिय हैं. प्रदीप ने आजादी मिलने से पहले ही किस्मत फ़िल्म में एक देशभक्ति गीत लिखा था आज हिमालय की चोटी से फ़िर हमने ललकारा.., दूर हटो ऐ दुनियावालों हिदोंस्तान हमारा है. उस समय यह गीत हर देशवासी की जुबान पर था. इसमें परोक्ष रूप से ब्रिटेन शासकों से भारत से हटने की बात कही गयी थी.   इसी तरह प्रदीप ने जागृति फ़िल्म में तीन देशभक्ति गीत लिखे. इनमें देश को आजादी दिलाने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की भूमिका, आजादी मिलने के बाद नौनिहालों से देश की रक्षा करने तथा देश के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का वर्णन करते हुए आजादी दिलाने में देशभक्तों की कुर्बानी को याद किया गया था. पाश्र्व गायिका आशा भोंसले के स्वर में दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल..गीत लोगों को सत्य और अहिंसा के पथ पर चलने का संदेश देता है. मोहम्मद रफ़ी की आवाज में हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के.. गीत देशवासियों को अनेक स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी के बाद मिली आजादी को संभाल कर रखने के साथ ही देश को आगे बढ़ाने की सीख देता है. तीसरा गीत स्वयं कवि प्रदीप ने गाया था. आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की. इसमें बच्चों को अपने शहीदों की कुर्बानी वाले ऐतिहासिक स्थलों के प्रति श्रद्धाभाव रखने की बात कही गयी है. कवि प्रदीप ने यूं तो कई देशभक्ति गीत लिखे, लेकिन उनके गैरफ़िल्मी देशभक्ति गीत ऐ मेरे वतन के लोगों.. जरा आंख में भर लो पानी. को सबसे अधिक लोकप्रियता मिली. इस गीत में देशवासियों से शहीदों की कुर्बानियों को याद रखने की बात कही गयी है. बताया जाता है कि पाश्र्वगायिका लता मंगेशकर ने 26 जनवरी 1963 को जब यह गीत गाया, तो प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आंखों से बरबस आंसू छलक आये थे.बॉलीवुड में मनोज कुमार, सुभाष घई आदि कुछ ऐसे फ़िल्मकार रहे हैं, जिनकी फ़िल्मों में देशभक्ति का कोई न कोई गीत जरूर रहता है. मनोज कुमार तो देशभक्ति की फ़िल्में बनाने के फ़लस्वरूप भारत कुमार. के नाम से ही प्रसिद्ध हो गये.उन्होंने मशहूर क्रांतिकारी भगत सिंह के जीवन पर 1962 में शहीद नाम से फ़िल्म बनायी. इसमें कुछेक गीतों छोड़ कर सभी देशभक्ति गीत थे. इस फ़िल्म के सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.., मेरा रंग से बसंती चोला, ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम.. आज भी देशवासियों में देशभक्ति का जुनून भर देते हैं. 1967 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे जय जवान जय किसान.को थीम बना कर उनकी एक और फ़िल्म आयी-उपकार. इस फ़िल्म देश की माटी के प्रति श्रद्धा को प्रकट करने के साथ ही जननायकों का बखान, मेरे देश की धरती सोना उगले.. उगले हीरे मोती.गीत के जरिये किया गया था.  मनोज कुमार ने 1970 में भी एक देशभक्तिपूर्ण फ़िल्म बनायी पूरब और पश्चिम. इस फ़िल्म का. है प्रीत जहां की रीत सदा मैं गीत वहां के गाता हूं..गीत काफ़ी हिट हुआ था. लंबे समय बाद मनोज कुमार के निर्देशन में 1981 में  क्रांति फ़िल्म आयी. देशप्रेमी, कर्मा, दिलजले, बार्डर, गदर, एक प्रेम कथा, द लीजेंड ऑफ़ भगत सिंह. एलओसी कारगिल, स्वदेश आदि फ़िल्में भी इसी सूची में शामिल हैं. |