आमिर -काजोल की फना और जॉन-कैटरीना की न्यूयॉर्क की तरह सैफ-करीना की कुर्बान भी आतंकवाद के बैकग्राउंड पर बनी फिल्म है. 9/11 के बाद अमेरिका में मुसलमानों की स्थिति और अमेरिका के खिलाफ मुसलमानों के गुस्से को इस फिल्म में अच्छी प्रकार दिखाया गया हैं. कहानी पुरानी होते हुए भी कलाकारों के दमदार एक्िटंग और उम्दा स्क्रीनप्ले से फिल्म देखने योग्य बन पड़ी है. फिल्म थोड़ी लंबी है और कई स्थानों पर काफी स्लो. फिल्म को ऐडट की काफी आवश्यकता है. गाने साधारण हैं, लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक काफी अच्छा है. सिनेमेटोग्राफी भी देखने योग्य है. यदि आप अच्छी स्क्रिप्ट की पावरफ़ुल फिल्म देखना चाहते हैं, तो इसे जरूर देखें.अवंतिका (करीना) न्यूयार्क से दिल्ली पढ़ाने आती है, जहां उसकी मुलाकात एहसान खान (सैफ अली खान) से होती है. कुछ ही दिनों में दोनों में प्यार हो जाता है और दोनों शादी कर अमेरिका चले जाते हैं. अमेरिका में अवंतिका को पता चलता है कि एहसान का संबंध आतंकवादियों से है. अवंतिका को एहसान और अन्य मुसलिम जेहादी कैद कर लेते हैं. किसी प्रकार अवंतिका एक टीवी रिपोर्टर (विवेक ओबेराय) को यह संदेशा भिजवाती है कि वह कैद में हैं. क्या अवंतिका आजाद हो पाती है, क्या जेहादियों की अमेरिका में बम ब्लास्ट की योजना सफल हो पाती है?करीना कपूर ने इस फिल्म के द्वारा यह फिर साबित किया है कि क्यों वह नंबर वन अभिनेत्री कहलाती हैं. चमेली के बाद उनका यह बेस्ट परफॉरमेंस है. अवंतिका की भूमिका के लिए उन्हें कई अवार्ड मिल सकते हैं. सैफ आतंकवादी के रोल में आकर्षित करते हैं. क्लाइमेक्स में उनका अभिनय दिल को छूता है. विवेक ओबेराय के लिए यह कमबैक फिल्म साबित हो सकती है. ओम पुरी और किरण खैर अच्छे हैं. कमजोर म्यूजिक और मनोरंजन का अभाव होने के कारण युवाओं को यह फिल्म ज्यादा आकर्षित नहीं करेगी, लेकिन लंबे किसिंग सीन और बेडरूम सीन के कारण क्राउड बढ़ सकता है. करीना-सैफ की ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री जमी है. गुरुवार को शानदार पेड प्रीमियर और शुरुआती रिपोर्ट से यह लगता है कि फिल्म अपनी लागत जरूर निकाल लेगी.
 
निर्माता : करण-हीरू जौहर
निर्देशक : रेंसिल डीसिल्वा
संगीत :  सलीम-सुलेमान
कलाकार :  सैफ अली खान, करीना कपूर, विवेक ओबेराय, किरण खैर, ओम पुरी ओद.
क्यों देखें : ग्रेट परफॉरमेंस, टाइट स्क्रिप्ट, निर्देशन.
क्यों न देखें : लंबी, जानी-पहचानी कहानी.
रेटिंग : 3/5.