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बाडमेर से निर्दलीय पर्चा दाखिल करेंगे:जसवंत
By Prabhat Khabar | Publish Date: Mar 23 2014 12:00AM | Updated Date: Mar 23 2014 6:40PM
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जोधपुर : लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से आहत पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने आज कहा कि उन्होंने बाडमेर से निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में चुनाव लडने का निर्णय किया है और कल अपना पर्चा दाखिल करेंगे.

सिंह हालांकि अभी पार्टी नहीं छोड रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह अगला कदम उठाने से पूर्व अपने सहयोगियों से विचार विमर्श करेंगे. उन्होंने कहा, हां, मैं कल बाडमेर से नामांकन पत्र दाखिल कर रहा हूं. निर्दलीय या नहीं, यह पार्टी के रुख पर निर्भर करेगा. उनसे पूछा गया था कि टिकट नहीं मिलने के बावजूद क्या वह चुनाव लडेंगे.

भाजपा के 76 वर्षीय नेता अभी दार्जिलिंग सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और इस बार बाडमेर से कांग्रेस से हाल ही में भाजपा में शामिल हुए कर्नल सोनाराम को पार्टी का टिकट मिलने से जसवंत काफी आहत है. भाजपा को 48 घंटे की समयसीमा दिये जाने के मद्देनजर अपने इस्तीफे के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, इस बारे में मैं बाडमेर में अपने सहयोगियों एवं अन्य लोगों के साथ विचार विमर्श करुंगा और फिर कोई निर्णय करुंगा. उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने के संबंध में 48 घंटे की समयसीमा तय किये जाने के बाद से भाजपा से किसी ने भी उनसे सम्पर्क करने की कोशिश नहीं की है.

जसवंत सिंह ने कहा, अगर मैं अपने घर और पार्टी के बारे में भावुक नहीं हूं तब मैं किस बारे में भावुक होउंगा... अगर पार्टी ने मुझसे बात करने का निर्णय किया है तब वे मेरा नंबर जानते हैं और यह भी कि मुझ तक कैसे पहुंचा जा सकता है. जब से मैं यहां हूं, किसी ने भी मुझसे सम्पर्क करने का प्रयास नहीं किया.

उनकी (जसवंत सिंह) सेवाओं का उपयुक्त ढंग से उपयोग करने की भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, मैं फर्नीचर का टुकडा नहीं हूं. समावेश करने के विशेषण का विकल्प अपने आप में मानसिकता को प्रदर्शित करता है. आप सिद्धांतों का समावेश नहीं कर सकते और यह अपमानजनक है.

चुनाव के बाद भरपायी करने की पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की टिप्पणी की कडी आलोचना करते हुए सिंह ने कहा, मैं इस विचार को खारिज करता हूं और मैं इसके पीछे की मानसिकता को भी खारिज करता हूं. ऐसा अनुमान है कि वे सरकार बना लेंगे और मुझे कोई स्थान दे देंगे. वे इसे अपने पास रख सकते हैं.

जसवंत सिंह ने कहा, इन शब्दों की श्रृंखला के पीछे के विचार अहंकार और असम्मान से परिपूर्ण हैं. राजस्थान में जसवंत सिंह समर्थकों की ओर से नरेन्द्र मोदी का पोस्टर फाडे जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, अगर पोस्टर फाडे गए हैं, तब मैं समझता हूं कि यह प्रदर्शिता करता है कि क्या हो रहा है.

जसवंत सिंह ने कहा, अपने पूरे राजनीतिक जीवन में मैंने परिस्थितियों के अनुरुप पार्टी की भलाई के लिए काम किया. मैंने सहूलियत की राजनीति को कभी नहीं अपनाया. भाजपा के वरिष्ठ नेता ने उन्हें टिकट नहीं दिये जाने के लिए कल पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा था कि असली और नकली भाजपा में फर्क करने का समय आ गया है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि पार्टी को बाहरी लोगों ने अपने हाथों में ले लिया है. जसवंज अपने गृह क्षेत्र बाडमेर से पार्टी टिकट की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह उनका अंतिम चुनाव होगा. सिंह अटल बिहार वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे और उन्होंने विदेश, रक्षा और वित्त मंत्री के रुप में काम किया. इस बीच जसवंत के पुत्र और विधायक मानवेन्द्र सिंह ने अपने पिता के पदचिन्हों पर चलने का संकेत दिया है.

उनके अनुभवों का करेंगे सदुपयोग

जसवंत सिंह को शांत करने के प्रयास में भाजपा ने शनिवार को कहा कि वह वरिष्ठ नेता हैं. उनकी सेवाओं का पार्टी उचित उपयोग करेगी. जसवंत के पार्टी छोड़ने संबंधी खबरों पर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी प्रतिष्ठा को टिकट के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए. वह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं. हम उनका सम्मान करते हैं. हम उनकी सेवाओं और अनुभव का सदुपयोग करेंगे. वर्तमान में दार्जिलिंग से सांसद जसवंत सिंह ने इस बार अपने गृह नगर बाड़मेर से उम्मीदवार बनाये जाने की इच्छा व्यक्त की थी. जसवंत पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के करीबी माने जाते हैं.

..और रो पड़े

अपनी अनदेखी से जसवंत सिंह इतने आहत हैं कि एक इंटरव्यू में अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाये और भावुक हो उठे. शनिवार को न्यूज चैनल एनडीटीवी को साथ इंटरव्यू के दौरान बोलते-बोलते उनका गला भर आया, वह चुप हो गये और आंसुओं को छलकने से रोकने लगे. हुआ यों कि 76 वर्षीय जसवंत से जब नकली लोगों वाले बयान पर सवाल पूछा, जवाब में जसवंत सिंह ने कहा, आपने फरमाया कि मैं वापस आ गया हूं. घर नहीं आऊंगा, तो कहां जाऊंगा .सोच कर तकलीफ होती है. इतना कहते-कहते उनकी आवाज भर्रा गयी.

बाद में खुद को संभाल कर उन्होंने बात पूरी की. उन्होंने कहा, असली बीजेपी-नकली बीजेपी..ये हमें सोच कर निर्णय करना पड़ेगा. यह ऐसी परीक्षा है, बार-बार लोगों को नहीं उलझना चाहिए. अभी जो कुछ हो रहा है, वास्तव में यही अंतर है असली और नकली बीजेपी के बीच.

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