लद्दाख में चीन की दादागिरी, पीछे हटने से इनकार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jul 2013 1:29 PM
लद्धाखः लद्धाख में भारत की सीमा में चीनी सैनिकों की घुसपैठ ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. मंगलवार को भारत और चीन के बीच ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत फेल होने के बाद भारत ने दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में सेना की एक टुकड़ी भेजने का फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक चीन ने दादागिरी […]
लद्धाखः लद्धाख में भारत की सीमा में चीनी सैनिकों की घुसपैठ ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. मंगलवार को भारत और चीन के बीच ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत फेल होने के बाद भारत ने दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में सेना की एक टुकड़ी भेजने का फैसला किया है.
सूत्रों के मुताबिक चीन ने दादागिरी दिखाते हुए इलाके को अपना हिस्सा बताया और पीछे हटने से इनकार कर दिया. चीन का दावा है कि जिस इलाके में उसने चौकी बनाई है वो उसके क्षेत्र का हिस्सा है.
भारत को एक बड़ा झटका देते हुए चीनी फौज से साफ कर दिया है कि वो दौलतबेग ओल्डी इलाके से वापस नहीं जाएंगे. चीन ने हिमाकत की हद तो ये की है कि अब वे इस इलाके को अपनी सरहद का हिस्सा बता रहे हैं. यानी पहले घुसपैठ कर कब्जा किया और अब चीन वहीं बैठ कर भारत को आंखें तरेर रहा है.
तनाव न बढ़े इसके लिए भारत की ओर से पहल भी हुई, भारतीय और चीनी फौज के ब्रिगेडियर लेवेल के अधिकारियों के बीच करीब तीन घंटे की बातचीत हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला, चीन दौलतबेग ओल्डी इलाके से टस से मस होने को राजी नहीं है. अब सवाल ये भी उठ रहे हैं कि आखिर चीनी फौज को भारतीय सीमा में दस किलोमीटर भीतर तक घुसने कैसे दिया गया.
भारत भी चीन की चाल भांपते हुए जवाबी कार्रवाई में जुट गया है. खबर है कि भारत अपनी फौजी टुकड़ी लद्दाख की सीमा में भेज सकता है. चीनी फौजियों के घुसपैठ की खबरों के बाद सेना ने लद्दाख स्काउट को पहले ही इस इलाके में भेज दिया है. इस विशेष दल में आईटीबीपी के जवान शामिल होते हैं. हालांकि सूत्रों की मानें तो भारत अब भी इस इलाके में फौजी तनाव नहीं चाहता है, यही वजह है कि मसले को बातचीत से सुलझाने की अभी और भी कोशिशें हो सकती है.
सेना के मुताबिक 15 अप्रैल की रात को डीबीओ सेक्टर में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की और भारतीय सीमा के 10 किलोमीटर के अंदर चौकी बना ली. बताया जा रहा है कि चीनी सैनिकों के दल में करीब 50 जवान हैं. दौलत बेग ओल्डी इलाके के अलावा चीनी फौज ने बीते 15 अप्रैल को ही पैंगौंग झील में भी घुसपैठ की है.
मुश्किल यह है कि भारत और चीन के बीच बनाई गई लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) को चीन के दबाव में आज तक चिन्हित नहीं किया जा सका है, और हर बार इसी का फायदा उठा कर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी भारतीय सीमा में दाखिल होती है. चीन की ओर से भारत को उकसाने वाली ये हरकतें अबतक तमाम कूटनीतिक कोशिशों के बाद भी बंद नहीं हुई है.
उधर लद्घाख में भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव के बीच आर्मी चीफ बिक्रम सिंह जम्मू के दौरे पर हैं. मंगलवार को आर्मी चीफ ने नगरोटा में नार्दन कमांड के चीफ लैफ्टिनैंट जनरल के.टी परनायक और 16 Corps के कमांडर लैफ्टिनेंट जनरल बी.एस. हुड्डा से ताजा हालात पर चर्चा की. आर्मी चीफ को फील्ड कमांडरों ने चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बारे में विस्तार से जानकारी दी. आर्मी चीफ ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात की.
लद्धाख हिल डेवलपमेंट काउंसिल के पूर्व सीईओ असगर करबलाई ने ताजा हालात के लिए भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. असगर करबलाई ने कहा है कि अगर भारत सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो लद्धाख और पूरे देश के लिए खतरा पैदा हो सकता है. करबलाई ने कहा कि चीन अपनी हदें पार कर रहा है और उस तक कड़ा संदेश पहुंचाना जरुरी है.
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