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निगाह रखें

।।अनुज कुमार सिन्हा।।
-राज्यसभा चुनाव : बिकिए मत-
-संदर्भ : चुनाव मंडी-

जिस तरीके से हेमंत सोरेन ने दिल्ली में जाकर कैंप किया, भाजपा के शीर्ष नेताओं को समझाया-बुझाया, आग्रह किया, बाहर आकर बयान दिया, उससे भाजपा विधायकों की असमंजस और बढ़ गयी है. तसवीर साफ़ नहीं पा रही है कि भाजपा विधायकों को वोट देना है या नहीं. भाजपा का निर्णय अगर फ़िर बदला, तो चुनाव की तसवीर भी बदल सकती है. हर प्रत्याशी वोट जुगाड़ने में लगा है. क्या होगा, कोई नहीं जानता. वह इसलिए, क्योंकि साफ़-साफ़ कोई बात नहीं करता. एक-दूसरे को संदेह की निगाह से देख रहा है. राजनीतिक दल (शीर्ष नेतृत्व ही) अपनी पूरी ताकत अपने विधायकों पर नजर रखने में लगा रहे हैं, ताकि वे इधर-उधर नहीं भाग जायें.

जब अकांउट फुल है फैसले तो लटकेंगे ही

खबर है कि अपनी केंद्र सरकार इन दिनों खुद को चलने-फिरने से असमर्थ पा रही है. सरकार के एक सलाहकार ने एक विदेश दौरे के दौरान सरकार की मेडिकल रिपोर्ट जारी कर दी है. उनका कहना है कि बाजारवाद को बढ़ावा देने के चक्कर और इस चक्कर के आगे-पीछे चल रहे छोटे-बड़े कई घनचक्करों के कारण इतने घोटाले-घपले हो चुके हैं कि अब कोई फैसला लेना मुश्किल हो रहा है.

यहां तो बस नेग पूरा करने की परंपरा है

गांव-जवार क्या, शहर के भी लोगों ने कभी न कभी, कहीं न कहीं सत्यनारायण की कथा तो सुनी ही होगी. यूं तो भगवान को कोई कुछ दे, इतनी किसी की औकात कहां, पर भगवान के नाम पर पंडित जी को तो थोड़ा बहुत दान-दक्षिणा मिल ही जाती है.

आंकड़ों पर इठलाइए नहीं, दिशा लीजिए

।। राजेंद्र तिवारी ।।
पिछले दिनों एक खबर छपी कि बिहार फिर जीडीपी वृद्धि दर में शीर्ष पर है. सबने बताया कि बिहार के आगे बढ़ने की रफ्तार बहुत तेज है. वाकई इस आंकड़े में कोई गलती नहीं है. लेकिन मेरे दिमाग में यह सवाल लगातार चलता रहता है कि जिस बिहार की विकास दर देश में सबसे ज्यादा है, उस बिहार के ग्रामीण इलाके की आबादी के जीवनस्तर में सुधार क्यों नहीं दिखायी देता.

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